मेरी पहली साइकिल की सवारी -अनुवादित कहानी
मेरे दादाजी ने सपना देखा था कि उनका पोता साइकिल चलाना सीखेगा। इस सपने को वास्तविकता की भूमि तब मिली जब मैं कक्षा 3 में आया। मेरे बड़े चचेरे भाई को साइकिल भेंट की गई जब वह मेरी उम्र का था। समय के साथ उसके पैर लंबे हो गए और वह उस छोटी साइकिल को संभालने में असमर्थ हो गया। इसलिए, यह तय हुआ कि मैं उस पुरानी नीली और लाल जंग लगी साइकिल का उपयोग करुँगा । जब इसे हमारे घर लाया गया था तो मैं सच में एक बड़ा तोहफा देखकर उत्साहित था इससे कोई फर्क नहीं पड़ता था कि मेरा उपहार वास्तव में नया था या पुराना। उन दिनों हम बहुत सी चीजों का जीर्णोद्धार किया करते थे। पड़ोस में एक लड़का, राजा, जो एक साइकिल की मरम्मत की दुकान में काम करता था, उसे मेरी साइकिल को तेल और पॉलिश करने और इसे सवारी करने योग्य बनाने के लिए कहा गया। उसे मेरा ट्रेनर बनने के लिए भी आमंत्रित किया गया था। पारिश्रमिक का कोई सवाल ही नहीं था; लेकिन उसे मेरे दादाजी ने एक प्रस्ताव दिया था। उन्होंने घोषणा की, "जिस दिन मेरा पोता खुद इस साइकिल की सवारी करेगा, उस दिन मैं तुम्हें बीस रसगुल्लों से भरा एक डिब्बा दूँगा ।" राजा मुस्कुराया और सहमति में अपना सिर हिला दिया ।
अगले दिन दोपहर में वह मुझे साइकिल चलाना सिखाने आया। एक बड़ा खुला मैदान था जहाँ आस-पास के लड़के दोपहर में फुटबॉल खेलते थे। वह साइकिल को मैदान के एक कोने पर ले आया और मुझसे कहा, " टाकू, दोनों हैंडल को कसकर पकड़ो और अपनी साइकिल से पैदल ही जमीन का चक्कर लगा लो ।" मुझे उस स्थान तक पहुँचने में लगभग सात मिनट लगे जहाँ वह खड़ा था। उसने कहा, "बहुत अच्छा, तुम इसे अच्छी तरह से सीख रहे हो। इसे दो बार और करो। मैं थोड़ा अचकचा गया। वह किस तरह का प्रशिक्षण था? जब मैं साइकिल से चल रहा था तो घुड़सवारी कैसे सीखूंगा? लेकिन मुझे अपने ट्रेनर की बात माननी पड़ी।
जब मैंने अपनी दूसरी बारी समाप्त की, तो उसने मेरी पीठ थपथपाई और प्रशंसा में घंटी बजाई। उसने आगे कहा , “अब अपनी साइकिल पर सवार हो जाओ। साइकिल की सीट पर ठीक से बैठ जाओ और हैंडल को स्थिर रूप से पकड़ना। तुमको याद रखना है कि तुम कभी भी पीछे मुड़कर मेरी ओर नहीं देखोगे और नीचे चलते हुए पहियों को भी नहीं देखोगे। हमेशा सामने देखना।" मुझे लगा कि मैं गिर जाऊँगा और चोटिल हो जाऊँगा। मैंने डरते हुए पूछा , "क्या मैं अपने पहले दिन ऐसा कैसे कर सकता हूँ?" राजा ने दृढ़ता से उत्तर दिया, “चिंता मत करो, दोस्त। मैंनेतुम्हें पीछे से पकड़ रखा होगा। जब मैं साइकिल पर बैठा, तो उसने मुझे कसकर पकड़ लिया ताकि मैं दोनों पहियों पर संतुलन खो न दूँ । उसने मुझे पैडल एक साथ, एक ऊपर और दूसरा नीचे धकेलने के लिए कहा। मैंने कहा, "राजा, मुझे डर है कि मेरा संतुलन बिगड़ जाएगा।" उसने मुझे आश्वासन दिया, "तुम कैसे गिरोगे, जब मैं तुम्हें अपने दोनों हाथों से सहारा दे रहा हूँ?"
मेरे दादाजी दूर एक लकड़ी की बेंच पर बैठे यह क्लास देख रहे थे। उन्होंने हस्तक्षेप नहीं किया क्योंकि वह स्वयं साइकिल चलाना नहीं जानते थे। जैसे ही पैडल मेरे पैरों से चलने लगे, साइकिल आगे बढ़ गई। मैं चिल्लाया, "राजा, मुझे मत छोड़ना।" मैंने उसे पीछे से कहते हुए सुना, "मैं यहीं हूँ, लेकिन पीछे मुड़कर मत देखो।" ऐसा लग रहा था कि मैं दो पंखों से उड़ रहा था, जबकि साइकिल वास्तव में चल रही थी। मैं जानता था कि राजा मेरे पीछे था। मैंने मैदान का चक्कर लगाने का वही रास्ता अपनाया और अपने सामने की ओर देखा जैसा मुझे बताया गया था। अचानक मैंने अपने दादाजी को मुझ पर मुस्कुराते हुए देखा। मैं वहीं रुक गया जहाँ वे खड़े थे और पीछे मुड़कर देखा। राजा वहाँ नहीं था। जिस जगह से मैंने साइकिल चलाना शुरू किया था, वहीं से वह हमारी ओर दौड़ रहा था। वह प्रसन्नता से पुकार रहा था, “दादाजी, टाकू ने इसे एक दिन में सीख लिया है। क्या अब आप अपना वादा नहीं निभाओगे?”
मेरे दादाजी बहुत आनंदित थे, "क्यों नहीं! मिठाई की दुकान पर चलते हैं। हम अभी इस कार्यक्रम का जश्न मनाएँगे।“
-अनुवादित
As a teenager I loved this story....and it tell us how there is always a sweet memory of our childhood that will always going to be in our mind till death....thank you for this lovely story ...and keep going.🩷🩵
जवाब देंहटाएंThank you so much.
हटाएंआपके द्वारा अनूदित लघुकथा पढ़कर मुझे भी अपने बचपन की याद या गई कि कैसे मैंने भी इसी तरह साइकिल सीखी थी। अनुवाद प्रभावी है और पाठक को अपने जीवन से जुड़ी घटनाओं की तरफ सोचने के लिए आकर्षित करता है। आपको इसके लिए साधुवाद।
जवाब देंहटाएंधन्यवाद। आप इसी तरह मेरे प्रेरणास्त्रोत बने रहें।
हटाएंNice start-up, Anita! Congratulations for opening your blog page. I really liked this story.
जवाब देंहटाएंThanks Suvadip for inspiring me to translate the story. It's a good start for me.
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